शादी कब होगी? कुंडली से जानिए
विवाह का समय कुंडली के सप्तम भाव, उसके स्वामी की दशा, और शुक्र-गुरु की दशा/गोचर से पढ़ा जाता है। जब सप्तम भाव से जुड़ी दशा चलती है और गुरु का गोचर सप्तम भाव या चंद्रमा पर होता है, तब विवाह के योग सक्रिय होते हैं। नवमांश (D-9) से समय की पुष्टि होती है।
विवाह में देरी क्यों होती है?
सप्तम भाव का स्वामी छठे, आठवें या बारहवें भाव में हो, शुक्र या गुरु अस्त/नीच/वक्री हों, शनि की दृष्टि सप्तम पर हो, या मंगल दोष (मंगल 1, 2, 4, 7, 8, 12 भाव में) — हर कारण का अलग उपाय है। शनि देरी करता है, इनकार नहीं; अस्त शुक्र समय के साथ लौट आता है। पहले सही निदान, फिर उपाय — यही डॉ. शर्मा की 1979 से पद्धति है।
जीवनसाथी कैसा होगा?
सप्तम भाव का स्वामी जीवनसाथी का चित्र खींचता है — सूर्य हो तो अधिकार-संपन्न, चंद्र हो तो भावुक और घरेलू, बुध हो तो बुद्धिमान, शुक्र हो तो आकर्षक, शनि हो तो परिपक्व और स्थिर। पुरुष की कुंडली में शुक्र और स्त्री की कुंडली में गुरु से यह चित्र और स्पष्ट होता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
क्या ज्योतिष से शादी की सही उम्र पता चल सकती है?
दशा-क्रम आयु की खिड़कियों में बदलता है — जैसे 26-28 वर्ष में सप्तमेश की अंतर्दशा। डॉ. शर्मा आपकी सटीक जन्म-तिथि, समय और स्थान से आपकी विशेष खिड़कियाँ बताते हैं।
प्रेम विवाह होगा या अरेंज्ड?
पंचम-सप्तम भाव का संबंध, शुक्र-मंगल का योग और सप्तम पर राहु का प्रभाव प्रेम विवाह के संकेत हैं; शुभ ग्रहों से युक्त सप्तम और नवम भाव की भागीदारी अरेंज्ड की ओर झुकती है।
मंगल दोष है तो क्या शादी नहीं होगी?
मंगल दोष अक्सर बढ़ा-चढ़ाकर बताया जाता है — कई कुंडलियों में इसके परिहार (cancellation) होते हैं। डॉ. शर्मा पहले जाँचते हैं कि दोष वास्तव में लागू है या नहीं।
परामर्श कैसे लें?
कुंडली और 90 पेज की PDF मुफ़्त है। पूर्ण परामर्श ₹5,100 — फ़ोन, WhatsApp (+91 80104 01001) या वीडियो पर, पूरी गोपनीयता के साथ।